आचमन विधि ज्ञान जांचे – Online Test Achaman vidhan

आचमन विधान

आचमन (Achaman) विधान कर्मकांड का एक महत्वपूर्ण विषय है । प्रत्येक कर्मों में आचमन करने का एक विशेष विधान है। शास्त्रों में विभिन्न वर्णों के आधार पर भी आचमन का भिन्न-भिन्न विधान बताया गया है। कई स्थितियों में आचमन हेतु विकल्प का भी विधान है। आचमन की संख्या भी कर्म के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इसी प्रकार आचमन के विषय में अनेकों महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिसे सभी कर्मकांडी को जानना आवश्यक होता है।

यहां दिये गये ऑनलाइन टेस्ट (मॉक टेस्ट) में भाग लेकर आचमन विषयक ज्ञान की वृद्धि की जा सकती है। ऑनलाइन टेस्ट में भाग लेने से पूर्व नीचे दिये गये आलेखों का अध्ययन भी आवश्यक है अन्यथा प्रश्नों के उत्तर देने में त्रुटि हो सकती है।

नीचे वो महत्वपूर्ण आलेख दिये जा रहे हैं जिनको पढ़कर इस जांच में भाग ले सकते हैं :

उपरोक्त पांच आलेखों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से आप इस जांच में सभी प्रश्नों के उत्तर दे पायेंगे। सभी आलेख नये टैब में खुलेंगे अतः इस जांच में पुनः सम्मिलित होने के लिये इस टैब पर ही वापस आयें।

आचमन विधि ज्ञान जांचे – Online Test Achaman vidhan

आचमन विधान

आचमन विधान की जांच

आचमन का कर्मकांड में बहुत ही महत्व होता है। यहां पर आचमन ज्ञान जांचने हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह है जिससे आचमन से संबंधित ज्ञान की परख की जा सकती है।

1 / 14

आचमन का तात्पर्य है :

2 / 14

सोकर उठने पर, भोजन करने पर, छींक आने पर, वस्त्र धारण करने पर कितनी बार आचमन करना चाहिये ?

3 / 14

किस दिशा की ओर बैठकर आचमन नहीं करना चाहिये ?

4 / 14

आचमन किस तीर्थ से करना चाहिये

5 / 14

कुशा धारण करके आचमन

6 / 14

आचमन करने हेतु जल की कितनी मात्रा कही गयी है ?

7 / 14

"सपवित्रेण हस्तेन कुर्यादाचमनक्रियाम्। नोच्छिष्टं तत्पवित्रं तु भुक्तोच्छिष्टं तु वर्जयेत् ॥" यह किसका वचन है ?

8 / 14

"सदोपवीतिनाभाव्यं सदा वद्धशिखेन च। विशिखो व्युपवीतश्च यत्करोति न तत्कृतः॥" यह किस स्मृति का वचन है ?

9 / 14

स्त्री-शूद्रों के लिये आचमन के स्थान पर क्या विकल्प कहा गया है

10 / 14

विष्णु भगवान का चरणामृत पान करके

11 / 14

आचमन का विकल्प क्या-क्या है ? 

12 / 14

दक्षिणाभिमुख आचमन करने पर पुनः शुद्धि का क्या विधान है ? 

13 / 14

आचमन के पश्चात् हस्तप्रक्षालन किस ओर करे ? 

14 / 14

"वातकर्म्मणि निष्ठीवे दन्तश्लिष्टे तथानृते । क्षुते पतितसंलापे दक्षिणश्रवणं स्पृशेत् ॥" यह किस पुराण का वचन है ?

Your score is

The average score is 23%

0%


Discover more from कर्मकांड सीखें

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *