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नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है – “क्या नारी सशक्तिकरण एक वैचारिक भ्रम है? शास्त्रों के प्रमाणों के साथ जानिए क्यों शक्ति को ‘सशक्त’ करना अज्ञान है और क्यों स्त्री को पुरुष के ‘समान’ बनाना उसका उत्थान नहीं, पतन है। एक क्रांतिकारी विश्लेषण।”

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लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

शास्त्रोक्त सत्य यह है कि स्त्री पुरुष की पूरक ही नहीं, उसकी आधारशिला है। पुरुष को महान ‘बनना’ पड़ता है, जबकि स्त्री महान ‘होती’ है। यदि हम उसे पुरुष की फोटोकॉपी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, तो हम एक ‘महान’ तत्व को ‘समान’ बनाकर उसे छोटा कर रहे हैं। यह समानता नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का सबसे बड़ा ‘अज्ञान’ है।

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मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति

मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति

मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति – “आरक्षण के कारण सवर्ण युवाओं के पलायन और योग्यता के हनन पर एक गंभीर विश्लेषण। जानें कैसे संवैधानिक विसंगतियाँ और निजी क्षेत्र में आरक्षण के प्रस्ताव सवर्णों के लिए अस्तित्वगत संकट उत्पन्न कर रहे हैं।”

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सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है - Constitutional oppression

सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है – Constitutional oppression

सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है – Constitutional oppression – क्या भारतीय लोकतंत्र अब जातीय संघर्ष का साधन बन चुका है? जानिए कैसे राजनीति और मीडिया सवर्णों का उत्पीड़न कर रहे हैं, ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे वैश्विक षड्यंत्रों का इसमें क्या हाथ है और इन संवेदनशील विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय की चुप्पी के पीछे का क्या कारण है। एक विस्तृत विश्लेषण।

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वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल - apatkal in india

वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल – apatkal in india

वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल – apatkal in india – निष्कर्ष

वर्तमान भारत में सांस्कृतिक आपात्काल केवल बाहर से थोपा गया नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की वैचारिक शून्यता का भी परिणाम है। राजनीति और न्यायपालिका जब समाज के नैतिक मार्गदर्शक बनने की कोशिश करते हैं, तो विसंगतियां उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

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क्या आप जानते हैं घर में दरिद्रता कैसे आती है - daridrata kaise aati hai

क्या आप जानते हैं घर में दरिद्रता कैसे आती है – daridrata kaise aati hai

क्या आप जानते हैं घर में दरिद्रता कैसे आती है – daridrata kaise aati hai : संसार में ऐसे कुछ ब्राह्मण ही होते हैं जो दरिद्रा से भयभीत नहीं होते, सामान्य जन दरिद्रा से भयभीत रहते हैं और कोई भी दरिद्रता नहीं चाहता। दरिद्रता से बचने के लिये यह जानना आवश्यक है कि दरिद्रता कहां-कहां जाती है।

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हत्यारिन पत्नी : क्यों और कैसे पत्नी बनी चुड़ैल - patni bani chudail

हत्यारिन पत्नी : क्यों और कैसे पत्नी बनी चुड़ैल – patni bani chudail

हत्यारिन पत्नी : क्यों और कैसे पत्नी बनी चुड़ैल – patni bani chudail : आये दिन पत्नी ही पति की हत्या करती है या कराती है ऐसे प्रकरण देखे जा रहे हैं और देश व समाज हतप्रभ है कि ये क्या हो रहा है ? इसके साथ ही एक अन्य प्रकार से भी पति की हत्या की जा रही है जिसमें पति को आत्महत्या करने के लिये बाध्य कर दिया जाता है और ऐसे भी कई प्रकरण देखे गये हैं जिसमें प्रताड़ित पति ने वीडियो भी बनाया और प्रताड़ना गाथा भी सुनाई या पत्रों में लिखा।

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धर्मांतरण या धर्म त्याग, पैतृक संपत्ति का अधिकार छीनो - paitrik sampatti ka adhikar chino

धर्मांतरण या धर्म त्याग, पैतृक संपत्ति का अधिकार छीनो – paitrik sampatti ka adhikar chino

धर्मांतरण या धर्म त्याग, पैतृक संपत्ति का अधिकार छीनो – paitrik sampatti ka adhikar chino : यह सिद्ध है कि धर्मत्याग करने वाला अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करेगा तो वह संपत्ति का भी उत्तराधिकारी नहीं हो सकता। ऐसे लोगों के अन्य संबंधी जिसने धर्मत्याग न किया हो और अगला श्राद्धाधिकारी हो श्राद्ध करने का और संपत्ति लेने का अधिकार भी उसी का होता है।

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परिवार का विघटन कर्ता धर्ता कौन - parivar ka vighatan

परिवार का विघटन कर्ता धर्ता कौन – parivar ka vighatan

परिवार का विघटन कर्ता धर्ता कौन – parivar ka vighatan : GDP, मंहगाई, अर्थव्यवस्था, पूंजीवाद, साम्यवाद, नारी उत्थान, मानवाधिकार, जीवनशैली, गुणवत्ता आदि उन्हीं विषयों की उसी प्रकार से चर्चा करते हैं तो वह लुटेरा चाहता है। पूर्व आलेख में हमने यह समझा है कि हमसे क्या लूटा जा रहा है और अब हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि लुटेरा आखिर है कौन, किस प्रकार से परिवार का विघटन (parivar ka vighatan) हो रहा है, कर्ता धर्ता कौन है ?

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लुटेरा कौन - Lutera Kaun

लुटेरा कौन – Lutera Kaun

लुटेरा कौन – Lutera Kaun : देखा जो जा सकता है वो यही है कि लूटा क्या जा रहा है और किसको लूटा जा रहा है, किन्तु इसमें आश्चर्यजनक यह है कि सभी लुट रहे हैं किन्तु कोई भी “चूं” करने को तैयार नहीं है अथवा समझ भी नहीं पा रहा है कि उसे भी लूटा गया है।

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