प्राक्कथन
नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतैरपि । अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्॥ सनातन धर्म में कर्मकांड केवल बाह्य अनुष्ठान नहीं, अपितु अंतःकरण की शुद्धि और देवऋण, पितृऋण तथा ऋषिऋण से विमुक्ति और आत्मकल्याण का शास्त्रीय मार्ग है जो सबसे सरल है। सरल का तात्पर्य यह है कि अन्यान्य अन्यान्य मार्ग में ही विशेष प्रयास की आवश्यकता होती कर्मकाण्ड…