
प्रश्नोपनिषद – Prashnopanishad
प्रश्नोपनिषद – Prashnopanishad : यहां प्रश्नोपनिषद (Prashnopanishad) संस्कृत में दिया गया है।
प्रश्नोपनिषद – Prashnopanishad : यहां प्रश्नोपनिषद (Prashnopanishad) संस्कृत में दिया गया है।
श्वेताश्वतरोपनिषद – Shwetashwataropanishad : वेदों के पश्चात् उपनिषदों को ही महत्वपूर्ण ग्रन्थ कहा जाता है। उपनिषदों में श्वेताश्वतरोपनिषद का महत्वपूर्ण स्थान है। श्वेताश्वतरोपनिषद में कुल छः अध्याय हैं जिनमें आपको अनेकों वेदमंत्र भी देखने को मिलते हैं। यहां श्वेताश्वतरोपनिषद (shwetashwatar upanishad) संस्कृत में दिया गया है।
आधुनिकतावादी का देखो छल बल, रच रहे अंधविश्वास का दलदल : यदि कोई अंधविश्वास बोले तो उससे पूछो अंधविश्वास क्या है ? और जिसे विषय को तुम अंधविश्वास कह रहे हो वह अंधविश्वास है ये सिद्ध करो। यदि तुमने ऐसा प्रश्न मात्र कर दिया तो ये सर पर पांव रखकर भागने लगेंगे।
पुनर्जागरण से आप क्या समझते हैं – punarjagran se aap kya samajhte hain : एक दिन में एक बार सोना-और-जगना निर्धारित है और इसमें पुनः का प्रयोग नहीं होगा किन्तु यदि दो बार हो तो पुनः प्रयुक्त होगा। इस प्रकार दुबारा सोने पर पुनर्शयन कहा जायेगा और पुनः उठने पर पुनर्जागरण।
अंधविश्वास किसे कहते हैं उदाहरण सहित जाने और समझें ~ andhvishwas kya hai : शास्त्रों में श्रुति (वेद) और स्मृति को नेत्र कहा गया है और इस नेत्र से विहीन व्यक्ति को अंधा कहा गया है। इस प्रकार इन श्रुति-स्मृति का जिसे ज्ञान न हो उस अंधे के कथन पर विश्वास करना अंधविश्वास होता है।
आसन विधि ज्ञान जांचे – Online Test Asan vidhan : कर्मकांड और धर्माचरण में आसन के संबंध में अनेकों विशेष नियम हैं जो प्रत्येक कर्मकांडी और कर्मकांड व धर्म में आस्था रखने वालों के लिये जानना आवश्यक है। इस ऑनलइन टेस्ट में आसन विधान से संबंधित प्रश्नों का संग्रह किया गया है।
शास्त्रों में अस्पृश्यता और वैधानिक समाधान से अस्पृश्यता का अंत – asprishyata kya hai : अस्पृश्यता की यहां जो व्याख्या की गयी है वह उस अस्पृश्यता से भिन्न है जिसका संविधान निषेध करता है और राजनीतिक रूप से कही-समझी जाती है। जिस अस्पृश्यता को राजनीतिक रूप से अपराध कहा गया है वह शास्त्रोक्त रूप से भी निषिद्ध ही है। किन्तु शास्त्रों में अस्पृश्यता की जो व्याख्या है वह राजनीतिक अस्पृश्यता की परिधि से बाहर है, आध्यात्मिक जीवन का अंग है इसके कुछ अपवाद भी हो सकते हैं।
आचमन विधान ज्ञान जांचे – Online Test Achaman vidhan : प्रत्येक कर्मों में आचमन करने का एक विशेष विधान है। शास्त्रों में विभिन्न वर्णों के आधार पर भी आचमन का भिन्न-भिन्न विधान बताया गया है। कई स्थितियों में आचमन हेतु विकल्प का भी विधान है। आचमन की संख्या भी कर्म के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। इसी प्रकार आचमन के विषय में अनेकों महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिसे सभी कर्मकांडी को जानना आवश्यक होता है।
शिखा विधान ज्ञान जांचे – Online Test Shikha vidhnam : यहां दिये गये ऑनलाइन टेस्ट (मॉक टेस्ट) में भाग लेकर शिखा विषयक ज्ञान की वृद्धि की जा सकती है। ऑनलाइन टेस्ट में भाग लेने से पूर्व नीचे दिये गये आलेखों का अध्ययन भी आवश्यक है अन्यथा प्रश्नों के उत्तर देने में त्रुटि हो सकती है।