Headlines

कर्मकांड सीखें

कर्मकांड सीखें

शूद्र भी सवर्ण है: फिर ये दूरियां क्यों? सवर्ण साथ में भोजन क्यों नहीं करते, विवाह क्यों नहीं करते ?

शूद्र भी सवर्ण है: फिर ये दूरियां क्यों? सवर्ण साथ में भोजन क्यों नहीं करते, विवाह क्यों नहीं करते ?

शूद्र भी सवर्ण हैं”: फिर ये दूरियां क्यों? सवर्ण साथ में भोजन क्यों नहीं करते, विवाह क्यों नहीं करते – क्या शूद्र सवर्ण हैं? जानिए वर्ण व्यवस्था का वास्तविक शास्त्रीय आधार, छुआछूत के पीछे की घृणित राजनीति और कैसे सामाजिक भेदभाव का लाभ उठाकर राष्ट्र विरोधी शक्तियां धर्मांतरण का जाल बुन रही हैं।

Read Full News
गर्व से कहो सवर्ण (savarna) हूँ! क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार 'शूद्र' (shudra) भी सवर्ण है? एक राजनैतिक षड्यंत्र का पर्दाफाश!

गर्व से कहो सवर्ण (savarna) हूँ! क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार ‘शूद्र’ (shudra) भी सवर्ण है? एक राजनैतिक षड्यंत्र का पर्दाफाश!

क्या शूद्र भी सवर्ण है? जानिए शास्त्रों का सत्य और राजनीतिक षड्यंत्र। – “क्या सवर्ण केवल तीन वर्णों तक ही सीमित है? जानिए स्मृतियों, वेदों और गीता के आधार पर ‘सवर्ण’ का वास्तविक अर्थ। क्यों राजनैतिक दल देश को जातीय संघर्ष की ओर धकेल रहे हैं और कैसे ब्राह्मण-विरोध के नाम पर आपके विवेक को कुंद किया जा रहा है? एक आँखें खोल देने वाला विश्लेषण।”

Read Full News
अंधभक्तों : आंखों की पट्टी खोलो, विकास के पीछे विनाश छुपा है

अंधभक्तों : आंखों की पट्टी खोलो, विकास के पीछे विनाश छुपा है

अंधभक्तों : आंखों की पट्टी खोलो, विकास के पीछे विनाश छुपा है : क्या भक्ति अब उन्माद बन चुकी है? जानें शास्त्रों के आलोक में अंधभक्ति के विविध स्वरूप—राजनैतिक, डिजिटल, चिकित्सकीय और शैक्षणिक। विवेक और अंधभक्ति के बीच के सूक्ष्म अंतर का शास्त्रीय विश्लेषण।

Read Full News
कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई

कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई

कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई : क्या बाल विवाह वास्तव में हमारी परंपरा है या शास्त्रोक्त सिद्धांत जिसे प्रकृति भी सत्यापित करती है। इसे कुरीति कहने वाले को दृष्टिदोष नहीं है क्या, धूर्त नहीं हैं क्या ? इस लेख में जानिए बाल विवाह के पीछे के सिद्धांतों, ऐतिहासिक कारणों, शास्त्रीय तथ्यों और समाज पर इसके वास्तविक प्रभावों की विस्तृत समीक्षा।

Read Full News
नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है – “क्या नारी सशक्तिकरण एक वैचारिक भ्रम है? शास्त्रों के प्रमाणों के साथ जानिए क्यों शक्ति को ‘सशक्त’ करना अज्ञान है और क्यों स्त्री को पुरुष के ‘समान’ बनाना उसका उत्थान नहीं, पतन है। एक क्रांतिकारी विश्लेषण।”

Read Full News
लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

शास्त्रोक्त सत्य यह है कि स्त्री पुरुष की पूरक ही नहीं, उसकी आधारशिला है। पुरुष को महान ‘बनना’ पड़ता है, जबकि स्त्री महान ‘होती’ है। यदि हम उसे पुरुष की फोटोकॉपी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, तो हम एक ‘महान’ तत्व को ‘समान’ बनाकर उसे छोटा कर रहे हैं। यह समानता नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का सबसे बड़ा ‘अज्ञान’ है।

Read Full News
मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति

मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति

मेधा का निर्वासन: आरक्षण की वेदी पर सवर्णों की आहुति – “आरक्षण के कारण सवर्ण युवाओं के पलायन और योग्यता के हनन पर एक गंभीर विश्लेषण। जानें कैसे संवैधानिक विसंगतियाँ और निजी क्षेत्र में आरक्षण के प्रस्ताव सवर्णों के लिए अस्तित्वगत संकट उत्पन्न कर रहे हैं।”

Read Full News
सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है - Constitutional oppression

सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है – Constitutional oppression

सामान्य वर्ग का संवैधानिक उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी: क्या लोकतंत्र अब जातीय गृहयुद्ध का टूल बन चुका है – Constitutional oppression – क्या भारतीय लोकतंत्र अब जातीय संघर्ष का साधन बन चुका है? जानिए कैसे राजनीति और मीडिया सवर्णों का उत्पीड़न कर रहे हैं, ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे वैश्विक षड्यंत्रों का इसमें क्या हाथ है और इन संवेदनशील विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय की चुप्पी के पीछे का क्या कारण है। एक विस्तृत विश्लेषण।

Read Full News
वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल - apatkal in india

वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल – apatkal in india

वर्त्तमान युग : भारतीय संस्कृति का आपत्काल – apatkal in india – निष्कर्ष

वर्तमान भारत में सांस्कृतिक आपात्काल केवल बाहर से थोपा गया नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की वैचारिक शून्यता का भी परिणाम है। राजनीति और न्यायपालिका जब समाज के नैतिक मार्गदर्शक बनने की कोशिश करते हैं, तो विसंगतियां उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

Read Full News
विवाह मुहूर्त : रात में विवाह करने वाले अवश्य जान लें

विवाह मुहूर्त : रात में विवाह करने वाले अवश्य जान लें

विवाह मुहूर्त : रात में विवाह करने वाले अवश्य जान लें – वर्त्तमान काल में एक प्रचलन चला दिया गया है जो प्राचीन काल से चलते आ रहा है उसे गलत कहना, कुतर्क करके गलत सिद्ध करना और उसके विरुद्ध सिद्धांत सिद्ध करना। इसमें एक विषय विवाह काल को लेकर आता है कि रात में विवाह करना गलत है सभी संस्कार दिन में होते हैं तो विवाह भी दिन में ही होने चाहिये।

Read Full News