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असुरक्षित यौन संबंध : दोष और दुष्परिणाम - unprotected sex

असुरक्षित यौन संबंध : दोष और दुष्परिणाम – unprotected sex

असुरक्षित यौन संबंध : दोष और दुष्परिणाम – unprotected sex : सनातन का जागरण हो रहा है तो जागरण व उन्माद में अंतर भी समझना होगा। जो शास्त्र ज्ञान के बिना शास्त्र विरुद्ध आचरण करते हुये मात्र तीर्थों व मंदिरों में पर्यटन करने को सनातन का जागरण सिद्ध करते हैं वो पुनः भ्रमित कर रहे हैं। सनातन के जागरण का तात्पर्य है शास्त्र ज्ञान प्राप्त करते हुये आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का प्रयास पुनः आरंभ हो।

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कलिवर्ज्य प्रकरण : क्या आप जानते हैं कलयुग में क्या-क्या वर्जित है - kalivarjya

कलिवर्ज्य प्रकरण : क्या आप जानते हैं कलयुग में क्या-क्या वर्जित है – kalivarjya

कलिवर्ज्य प्रकरण : क्या आप जानते हैं कलयुग में क्या-क्या वर्जित है – kalivarjya : हम अनेकानेक ऐसे व्यवहार में भी लिप्त होते जो वास्तव में कलिवर्ज्य है किन्तु इसका हमें ज्ञान नहीं होता। हमें ऐसा प्रतीत होता है कि हम जो कर रहे हैं वह शास्त्रसम्मत है किन्तु वास्तव में वह कलिवर्ज्य होता है। धर्मानुरागियों के लिये यह संकलन बहुत ही उपयोगी है।

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ब्राह्मणवाद से भारत रसातल में कैसे चला गया, ब्राह्मणवाद अभिशाप क्यों बना ? what is brahmanwad

ब्राह्मणवाद से भारत रसातल में कैसे चला गया, ब्राह्मणवाद अभिशाप क्यों बना ? what is brahmanwad

ब्राह्मणवाद से भारत रसातल में कैसे चला गया, ब्राह्मणवाद अभिशाप क्यों बना ? what is brahmanwad : वामपंथियों/देशद्रोहियों की निर्लज्जता असीमित है और इसका प्रमाण यह है की ये भारतीय संस्कृति की निंदा करते हैं और विदेशी संस्कृति का प्रचार-प्रसार, ये भारतीय भाषा (हिन्दी-संस्कृत) का तो विरोध करते हैं किन्तु विदेशी भाषाओं (अंग्रेजी) के प्रचार-प्रसार में बढ़-चढ़कर भागीदार बनते हैं। इनको ब्राह्मण जो भारतीय संस्कृति, अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि का केन्द्रबिन्दु है वह आतंकी लगता है और जो म्लेच्छ यत्र-तत्र-सर्वत्र पत्थरबाजी, बमबाजी, बलात्कार, हिंसा आदि ही करते रहते हैं वो शांतिदूत लगता है।

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आम की समिधा हवन में ग्राह्य या अग्राह्य - Amra samidha

आम की समिधा हवन में ग्राह्य या अग्राह्य – Amra samidha

आम की समिधा हवन में ग्राह्य या अग्राह्य – Amra samidha : हवन में आम की समिधा ग्राह्य है अथवा नहीं यह गंभीर प्रश्न है और इसका उत्तर कुछ विद्वान ग्राह्य बताते हैं तो कुछ विद्वान अग्राह्य बताते हैं।

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संसर्गाशौच व निवारण अर्थात संसर्गी शुद्धि विधान

संसर्गाशौच व निवारण अर्थात संसर्गी शुद्धि विधान

संसर्गाशौच व निवारण अर्थात संसर्गी शुद्धि विधान : अशौच प्रकरण में एक महत्वपूर्ण विषय है संसर्गाशौच विचार जिसकी चर्चा शेष है और यहां वही चर्चा प्रस्तुत है अर्थात यदि अशौची व्यक्ति से संसर्ग हो तो संसर्ग करने वाले की शुद्धि का विधान।

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क्या सनातन सिद्धांतों को विज्ञान द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य है - Dharm aur Vaigyanita

क्या सनातन सिद्धांतों को विज्ञान द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य है – Dharm aur Vaigyanita

क्या सनातन सिद्धांतों को विज्ञान द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य है – Dharm aur Vaigyanita : धर्म और अध्यात्म की सीमा का आरम्भ ही वहां से होता है जहां विज्ञान की सीमा समाप्त हो जाती है और विज्ञान की कसौटी पर धार्मिक सिद्धांतों को कसने का प्रयास करना एक कुकृत्य ही है।

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अंधविश्वास किसे कहते हैं उदाहरण सहित जाने और समझें ~ andhvishwas kya hai

अंधविश्वास किसे कहते हैं उदाहरण सहित जाने और समझें ~ andhvishwas kya hai

अंधविश्वास किसे कहते हैं उदाहरण सहित जाने और समझें ~ andhvishwas kya hai : शास्त्रों में श्रुति (वेद) और स्मृति को नेत्र कहा गया है और इस नेत्र से विहीन व्यक्ति को अंधा कहा गया है। इस प्रकार इन श्रुति-स्मृति का जिसे ज्ञान न हो उस अंधे के कथन पर विश्वास करना अंधविश्वास होता है।

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इन पांच सूत्रों से कर्मकांड सीखें - 5 sutro se karmkand sikhe

इन पांच सूत्रों से कर्मकांड सीखें – 5 sutro se karmkand sikhe

इन पांच सूत्रों से कर्मकांड सीखें – 5 sutro se karmkand sikhe : योग्यता-कुशलता का तात्पर्य यह भी नहीं होता कि पुस्तकों को पढ़ लेने मात्र प्राप्त हो जाती है यदि ऐसा हो तो सबके घर में पुस्तकालय हो, विद्यालय/महाविद्यालय/विश्वविद्यालय मात्र परीक्षा लेने के लिये ही हो। कर्मकांड सीखने के लिये प्रशिक्षण, नित्यकर्म, अध्ययन, स्मरण, विश्वास आदि मुख्य सूत्र हैं और इन पंचसूत्रों के द्वारा कुशल कर्मकांडी बना जा सकता है।

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सनातन धर्म में नित्यकर्म: एक विस्तृत अध्ययन | आवश्यकता या अनिवार्यता - Nitya Karma in Hindi

सनातन धर्म में नित्यकर्म: एक विस्तृत अध्ययन | आवश्यकता या अनिवार्यता – Nitya Karma in Hindi

सनातन धर्म में नित्यकर्म: एक विस्तृत अध्ययन | आवश्यकता या अनिवार्यता – Nitya Karma in Hindi – आवश्यकता यह है कि क्या हम वर्त्तमान में भी परतंत्र हैं और यदि परतंत्र हैं तो स्वतंत्र होने का प्रयास करना चाहिये। यदि स्वतंत्र हो गए हैं तो अपने धर्म-कर्म का पालन करना आरम्भ करना चाहिये। नित्यकर्म को आवश्यक नहीं अनिवार्य समझना चाहिये और स्वयं भी सीखकर प्रारम्भ करना चाहिये, आत्मकल्याण का प्रयास करना चाहिये।

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