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कर्मकांड सीखें

कर्मकांड सीखें

युगधर्म

कर्मकाण्ड के विषय में भ्रम का मूल कारण यह है कि वर्त्तमान में अनेकों विधर्म को भी धर्म घोषित किया जा रहा है और जनमानस को यही सिखाया-बताया जा रहा है और भ्रमित जनमानस शास्त्रों से विमुख होकर ऐसा ही समझती है।  इसके साथ ही लोकतंत्र का यह स्वभाव है कि वह जनमानस को अपने…

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प्राक्कथन

नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतैरपि । अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्॥  सनातन धर्म में कर्मकांड केवल बाह्य अनुष्ठान नहीं, अपितु अंतःकरण की शुद्धि और देवऋण, पितृऋण तथा ऋषिऋण से विमुक्ति और आत्मकल्याण का शास्त्रीय मार्ग है जो सबसे सरल है। सरल का तात्पर्य यह है कि अन्यान्य अन्यान्य मार्ग में ही विशेष प्रयास की आवश्यकता होती कर्मकाण्ड…

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क्या आप योग्य ब्राह्मण हैं अथवा नामधारक या अयोग्य

क्या आप योग्य ब्राह्मण हैं अथवा नामधारक या अयोग्य

क्या वर्तमान कर्मकांडी ब्राह्मण शास्त्रसम्मत हैं? जानें योग्य और अयोग्य ब्राह्मण के लक्षण, सरकारी नीतियों का प्रभाव और पौरोहित्य में बढ़ती अज्ञानता का समाधान। अंगिरा, वशिष्ठ और शातातप स्मृतियों के आलोक में एक गंभीर विश्लेषण।

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स्वर्ग में लोकतंत्र: भाग ३ — "अधिकारों का मोह और विवेक की परीक्षा"

स्वर्ग में लोकतंत्र: भाग ३ — “अधिकारों का मोह और विवेक की परीक्षा”

स्वर्ग में लोकतंत्र भाग ३: जब रम्भा और मेनका ने वरुण और कुबेर को अधिकारों के जाल में फंसाया। पढ़िए लोकतंत्र के उन दोषों का शास्त्रीय विश्लेषण जो आज तक आपसे छिपाए गए।

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स्वर्ग में लोकतंत्र: भाग २ — प्रतिशोध और अधिकार का संघर्ष

स्वर्ग में लोकतंत्र: भाग २ — प्रतिशोध और अधिकार का संघर्ष

स्वर्ग में लोकतंत्र: भाग २ — प्रतिशोध और अधिकार का संघर्ष : “जब इंद्र के कोप ने रम्भा के स्वाभिमान को कुचला, तो जन्म हुआ स्वर्ग के पहले विद्रोह का। क्या लोकतंत्र के नाम पर रम्भा ले पाएगी अपना प्रतिशोध? पढ़िए ‘स्वर्ग में लोकतंत्र’ का दूसरा रोमांचक अध्याय।”

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स्वर्ग में विद्रोह: क्या बहुमत के आगे झुकेंगे देवराज इंद्र?

स्वर्ग में विद्रोह: क्या बहुमत के आगे झुकेंगे देवराज इंद्र?

स्वर्ग में विद्रोह: क्या बहुमत के आगे झुकेंगे देवराज इंद्र – “जब देवर्षि नारद ने स्वर्ग की सभा में पृथ्वी के ‘लोकतंत्र’ का सत्य बताया, तो कैसे मर्यादा और अनुशासन की नींव हिल गई? पढ़िए ‘स्वर्ग में लोकतंत्र’ नाटक का पहला भाग, जहाँ कुतर्कों ने देवताओं को भी भ्रमित कर दिया।”

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जागो सनातनियों … प्रगतिशीलता की पट्टी बांधकर आधुनिकता के नाम पर म्लेच्छाचार थोपा जा रहा है

जागो सनातनियों … प्रगतिशीलता की पट्टी बांधकर आधुनिकता के नाम पर म्लेच्छाचार थोपा जा रहा है

वर्तमान युग में ‘प्रगतिशीलता’ के नाम पर शास्त्र-निषिद्ध आचरण (म्लेच्छाचार) को थोपा जा रहा है। क्या संस्कारों की बलि देकर और पाश्चात्य जीवनशैली अपनाकर हिन्दू राष्ट्र का निर्माण संभव है? जानिए शास्त्रों के १० प्रमाणों के साथ आधुनिकता और सनातन धर्म के बीच का गहरा विरोधाभास।

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वोट दिया, अब गाय खा : मिथुन है गाय नहीं...

वोट दिया, अब गाय खा : मिथुन है गाय नहीं…mithun is cow or not

mithun is cow or not – वोट दिया, अब गाय खा : मिथुन है गाय नहीं… : क्या मिथुन वास्तव में गौ नहीं है? न्याय दर्शन और स्मृतियों के आधार पर मिथुन (गवय) और गोवंश की तात्विक एकता एवं उसके भक्षण निषेध का विस्तृत और शुद्ध शास्त्रीय विश्लेषण।

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विवेक की अचेतावस्था: आधुनिक शिक्षा, सामाजिक पतन और 'संघ' के नैरेटिव का शास्त्र सम्मत विश्लेषण

विवेक की अचेतावस्था: आधुनिक शिक्षा, सामाजिक पतन और ‘संघ’ के नैरेटिव का शास्त्र सम्मत विश्लेषण

विवेक की अचेतावस्था: आधुनिक शिक्षा, सामाजिक पतन और ‘संघ’ के नैरेटिव का शास्त्र सम्मत विश्लेषण – क्या शिक्षा वास्तव में समस्याओं का समाधान है? जानिए क्यों आधुनिक शिक्षा के साथ अपराध और दुराचार बढ़ रहे हैं। विवेक

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शम्बूक वध विवाद: एक बड़ा षडयंत्र

शम्बूक वध विवाद: एक बड़ा षडयंत्र

“शम्बूक वध की वास्तविकता क्या है? वाल्मीकि रामायण और पद्म पुराण के प्रमाणों के आधार पर जानें कि कैसे यह वध एक शास्त्रीय न्याय था। आधुनिक इतिहासकारों और ‘कर्मणा वर्णव्यवस्था’ के समर्थकों के षड्यंत्र का पर्दाफाश करने वाला एक विस्तृत शास्त्रीय लेख।”

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