बिना पंडित के स्वयं पूजा, अनुष्ठान विधि, हवन आदि करना कैसे सीखें - bina pandit ke karmkand

बिना पंडित के स्वयं पूजा, अनुष्ठान विधि, हवन करना कैसे सीखें – bina pandit ke karmkand

बिना पंडित के स्वयं पूजा, अनुष्ठान विधि, हवन करना कैसे सीखें – bina pandit ke karmkand : शास्त्रोक्त विधि के अनुसार सभी कर्मों में (नित्यकर्म को छोड़कर) ब्राह्मण (कर्मकांडी) की आवश्यकता होती ही है। उपदेश (आज्ञा) देने से लेकर दान-दक्षिणा-भोजन ग्रहण करने के लिये और सम्पूर्णता का वचन देने के लिये कर्मकांडी ब्राह्मण अनिवार्य होते हैं और यही शास्त्रों में बताया गया है। यदि कोई शास्त्रोक्त कर्म बिना पंडित (ब्राह्मण-कर्मकांडी) के करते हैं तो वह शास्त्र विधि से रहित होता है और वह कल्याणकारी तो कदापि नहीं होता किन्तु शस्त्रोलन्घन का दोष प्रदान करने वाला होता है।

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यदि आपको कर्मकांडी बनना है तो इन्हें अच्छी तरह से समझें : रस्म रिवाज परम्परा प्रथा और विधि विधान

यदि आपको कर्मकांडी बनना है तो इन्हें अच्छी तरह से समझें : रस्म रिवाज परम्परा प्रथा और विधि विधान

यदि आपको कर्मकांडी बनना है तो इन्हें अच्छी तरह से समझें : रस्म रिवाज परम्परा प्रथा और विधि विधान : इस आलेख में शब्द का महत्व स्पष्ट करते हुये यह बताया गया है कि रीति-परंपरा-प्रथा-विधि-विधान आदि शब्दों के स्थान पर रस्म-रिवाज़ जैसे शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं है, इसी प्रकार से विवाह के लिये शादी-मैरिज आदि शब्दों का प्रयोग करना भी अनुचित है। इसके साथ ही परम्परा और विधान के संबंध में उदाहरण सहित विस्तृत चर्चा की गयी है एवं परम्परा और विधान के अंतर को गंभीरता से समझने के लिये दोनों के पर्याप्त उदाहरण भी प्रस्तुत किये गये हैं।

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