कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई

कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई

कर्णधारों का दृष्टिदोष या समाज का कोढ़? बाल विवाह की कड़वी सच्चाई : क्या बाल विवाह वास्तव में हमारी परंपरा है या शास्त्रोक्त सिद्धांत जिसे प्रकृति भी सत्यापित करती है। इसे कुरीति कहने वाले को दृष्टिदोष नहीं है क्या, धूर्त नहीं हैं क्या ? इस लेख में जानिए बाल विवाह के पीछे के सिद्धांतों, ऐतिहासिक कारणों, शास्त्रीय तथ्यों और समाज पर इसके वास्तविक प्रभावों की विस्तृत समीक्षा।

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नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है

नारी सशक्तिकरण : नारी ही शक्ति है, उसे सशक्त करना विरोधाभास है – “क्या नारी सशक्तिकरण एक वैचारिक भ्रम है? शास्त्रों के प्रमाणों के साथ जानिए क्यों शक्ति को ‘सशक्त’ करना अज्ञान है और क्यों स्त्री को पुरुष के ‘समान’ बनाना उसका उत्थान नहीं, पतन है। एक क्रांतिकारी विश्लेषण।”

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लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

लड़का-लड़की एक समान: सम्मान, महान या अज्ञान?

शास्त्रोक्त सत्य यह है कि स्त्री पुरुष की पूरक ही नहीं, उसकी आधारशिला है। पुरुष को महान ‘बनना’ पड़ता है, जबकि स्त्री महान ‘होती’ है। यदि हम उसे पुरुष की फोटोकॉपी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, तो हम एक ‘महान’ तत्व को ‘समान’ बनाकर उसे छोटा कर रहे हैं। यह समानता नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का सबसे बड़ा ‘अज्ञान’ है।

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