
स्त्री धर्म को समझें शौचांतर विधि एवं गोसेवा | stri dharm – 4
शौचांतर विधि एवं गोसेवा : चाहे जितना जोर लगा लो , चाहे जितना शोर मचा लो , नहीं झुकेगी नारी हिंदुस्तानी
पातिव्रत्य को धर्म समझे, सदाचार के मर्म को जाने, वही है नारी हिंदुस्तानी।
वर्त्तमान युग में हम स्वेच्छाचारिता की सीमाओं का निरंतर विस्तार करते जा रहे हैं और उसे आधुनिकता का आवरण देते हुये उचित सिद्ध करने का भी प्रयास करते रहते हैं। ये स्वेच्छाचारिता पुरुष व स्त्री दोनों ही वर्गों में, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्णों में देखने को मिलती है, आश्रमों की बात न ही करें तो उचित होगा। यहां हम स्त्री धर्म (stri dharm niti) के लिये शास्त्रोक्त प्रमाणों के अनुसार विचार करेंगे जिससे स्वेच्छाचारिता भी स्पष्ट हो जायेगा। सामान्यतः पुरुषों के लिये धर्म, कर्म, मर्यादा, आचरण आदि शास्त्रों में सर्वत्र भरे-परे हैं किन्तु स्त्रियों के लिये नहीं हैं ऐसा नहीं है। स्त्रियों के लिये भी कर्तव्याकर्तव्य का शास्त्रों में निर्धारण किया गया है और जो भी आध्यात्मिक चर्चा करते हैं उनके लिये स्त्रियों के धर्म, कर्म, मर्यादा, आचरण आदि की चर्चा भी आवश्यक है। यदि चर्चा ही नहीं करेंगे तो आधुनिकता के नाम पर दुर्गंध ही फैलता रहेगा।
शौचांतर विधि एवं गोसेवा : चाहे जितना जोर लगा लो , चाहे जितना शोर मचा लो , नहीं झुकेगी नारी हिंदुस्तानी
पातिव्रत्य को धर्म समझे, सदाचार के मर्म को जाने, वही है नारी हिंदुस्तानी।
स्त्री धर्म को समझें शौच विधान | stri dharm – 3 : वर्त्तमान समय में कलयुग का ऐसा प्रभाव छा रहा है कि सभी स्वधर्म का परित्याग करके समानता-समानता चिल्ला रहे हैं, स्वेच्छाचारी बनकर स्वतंत्रता-स्वतंत्रता चिल्ला रहे हैं, धर्म का त्याग करके संविधान-संविधान, सदाचार-कुलीनता आदि का त्याग करके शिक्षा-शिक्षा चिल्ला रहे हैं।
stri dharm – स्त्री धर्म को समझें भाग – २ : वो अवश्य ही सोचनीय हैं जो गृह संचालन तो नहीं करती देश को संचालित करके अहंकार पालती हैं और यहां गीता के वचन “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः” का स्मरण करते हुये विचार करना होगा कि स्त्री यदि स्वधर्म का त्याग कर रही है तो उसका दुष्परिणाम क्या होगा ?
शास्त्र के प्रमाणों से समझें स्त्री धर्म क्या है – stri dharm niti : स्त्री धर्म से संबंधित इस प्रथम भाग में स्त्रीधर्म का आरम्भ कब से होता है इसको समझते हुये स्त्रियों के जगने व धान्यसंस्कार, गृहशुद्धि आदि विषयों को समझने का प्रयास किया गया है। इसके आगे के अन्य और भी विषय हैं जो स्त्री धर्म भाग २ में समझेंगे।