शिखा विधान ज्ञान जांचे – Online Test Shikha vidhnam

शिखा विधान : शिखा का महत्व - shikha ka mahatva

शिखा विधान कर्मकांड का एक महत्वपूर्ण विषय है भले ही वर्त्तमान में यह वैज्ञानिकता आदि के कारण चर्चित रहता हो किन्तु इसके वैज्ञानिक तथ्यों के समझने से अधिक आवश्यक है शास्त्रोक्त तथ्यों को समझना। वैज्ञानिकता के आधार पर यही धर्म-अध्यात्म के विषयों की सिद्धि करने लगेंगे तो भ्रमित हो जायेंगे। कर्मकांडियों के लिये तो यह आवश्यक है कि कर्मकांड/आध्यात्मिक विषयों के बारे में शास्त्रोक्त ज्ञान रखे।

शिखा विधान ज्ञान जांचे – Online Test Shikha vidhnam

शिखा के संबंध में कुछ भ्रामक धारणा भी बनी हुई है और ऐसी परंपरा बनती जा रही है कि शिखा मात्र प्रतीकात्मक वस्तु है और जीविका आदि का प्रश्न हो तो इसका त्याग किया जा सकता है। किन्तु यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। शिखा विधान से संबंधित महत्वपूर्ण बातों को समझने के लिये नीचे दिये गए आलेखों के साथ-साथ यहां दिये गये विडियो को भी देख सकते हैं।

यहां दिये गये ऑनलाइन टेस्ट (मॉक टेस्ट) में भाग लेकर शिखा विषयक ज्ञान की वृद्धि की जा सकती है। ऑनलाइन टेस्ट में भाग लेने से पूर्व नीचे दिये गये आलेखों का अध्ययन भी आवश्यक है अन्यथा प्रश्नों के उत्तर देने में त्रुटि हो सकती है।

नीचे वो महत्वपूर्ण आलेख दिये जा रहे हैं जिनको पढ़कर इस जांच में भाग ले सकते हैं :

उपरोक्त पांच आलेखों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से आप इस जांच में सभी प्रश्नों के उत्तर दे पायेंगे। सभी आलेख नये टैब में खुलेंगे अतः इस जांच में पुनः सम्मिलित होने के लिये इस टैब पर ही वापस आयें।

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शिखा विधान : शिखा का महत्व - shikha ka mahatva

शिखा विधान

सभी धार्मिक कर्मों में शिखा ग्रंथि को आवश्यक बताया गया है और जिसमें ग्रंथि नहीं रखना चाहिये उसका भी वर्णन किया गया है। यहां शिखा विषयक महत्वपूर्ण प्रश्न दिया गया है जिसमें भाग लेने से शिखा विषयक ज्ञान का परिक्षण होता है।

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शिखा और यज्ञोपवीत से रहित होकर जो कर्म किया जाता है वह

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पूजा आदि कर्मों में शिखा ग्रंथि कब करें ?

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शिखा ग्रंथि का मंत्र है :

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क्या गायत्री मंत्र से भी शिखा ग्रंथि की जा सकती है ?

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"सदोपवीतिनाभाव्यं सदा वद्धशिखेन च। विशिखो व्युपवीतश्च यत्करोति न तत्कृतः॥" यह किस स्मृति का वचन है ?

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अज्ञान-मोहादि किसी कारण यदि शिखा छेदन कर लिया जाय तो क्या प्रायश्चित करना चाहिये ?

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शिखरहित होने पर वैकल्पिक शिखा कितनी कुशाओं से बनाये ?

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शिखा रहित होने पर कुशा की शिखा कब धारण करे ?

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शिखाहीन होने पर कुशा की शिखा कहां धारण करे ?

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शिखा के अभाव में शिर को वस्त्र से ढंक लेना चाहिये, यह कथन

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विनम्र आग्रह : त्रुटियों को कदापि नहीं नकारा जा सकता है अतः किसी भी प्रकार की त्रुटि यदि दृष्टिगत हो तो कृपया सूचित करने की कृपा करें : info@karmkandvidhi.in

कर्मकांड सीखें वेबसाइट पर शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।


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